
ऋषिकेश।अपने प्रियजन के असामयिक निधन से टूटे हुए मन के बावजूद, परिजनों ने मानवता का परिचय देते हुए नेत्रदान जैसा महान कार्य कर समाज को नई दिशा दी। अपनों के जाने का गहरा दुख होने के बाद भी, परिजनों ने अपने आँसुओं को किसी और की अंधेरी ज़िंदगी में रोशनी बनने दिया।
पूर्व पार्षद हरीश आनंद ने ईश्वर का धन्यवाद करते हुए भावुक स्वर में कहा कि उन्हें अपनी धर्मपत्नी श्रीमती शशि आनंद के जाने का अपार दुख है, लेकिन इस बात का सुकून भी है कि उनकी आँखों से किसी ज़रूरतमंद को जीवन की नई रोशनी अवश्य मिलेगी। यह सोच ही उनके लिए इस असहनीय दुख को सहने की शक्ति बन गई।
नेत्रदान के इस पुनीत कार्य से जुड़े लायंस क्लब ऋषिकेश देवभूमि के चार्टर अध्यक्ष गोपाल नारंग ने जानकारी देते हुए बताया कि विगत पखवाड़े में अनेक परिवारों ने नेत्रदान कर मानवता का अनुपम उदाहरण प्रस्तुत किया।
सुभाष नगर बनखंडी निवासी स्व. जसवंत सिंह रतन के निधन पर हिम्मत सिंह की सूचना पर, प्रेम नगर निवासी स्व. फूला रानी खन्ना एवं स्व. संजय कुमार के निधन पर अमित भाटिया की प्रेरणा से तथा ऋषिकेश निवासी स्व. श्रीमती शशि आनंद के निधन पर हिमालयन हॉस्पिटल की नेत्रदान रेस्क्यू टीम के डॉ. रोहित मेहंदीरत्ता द्वारा सफलतापूर्वक कॉर्निया सुरक्षित प्राप्त किए गए।
इसी क्रम में स्व. श्रीमती आशा सरन के निधन पर राकेश नागपाल के प्रेरित करने पर निर्मल आई हॉस्पिटल की टीम के डॉ. रंग एवं डॉ. मकरेंदु ने निवास पर पहुँचकर कॉर्निया सुरक्षित किए।
नेत्रदान जैसे पुण्य कार्य के लिए श्री हिम्मत सिंह, अमित भाटिया, संदीप मल्होत्रा, अजय कालड़ा, राकेश नागपाल, सुलभ अग्रवाल, हरीश अरोड़ा, कृष्णा खुराना सहित अनेक गणमान्य नागरिकों ने परिजनों को साधुवाद देते हुए उनके साहस और संवेदनशीलता की सराहना की।
लायंस क्लब ऋषिकेश देवभूमि के जनसंपर्क अधिकारी मनमोहन भोला ने बताया कि यह मिशन का 439वां सफल प्रयास है, जो निरंतर और अविरल रूप से चलता रहेगा, ताकि किसी की मृत्यु किसी और के जीवन में नई रोशनी बन सके।










