कागजों पर विकास या धरातल पर कुछ हकीकत? मिर्ज़ापुर जिला राज पंचायत अधिकारी पर लगा प्रश्न चिन्ह
मिर्ज़ापुर जनपद में राज्य सरकार एवं केन्द्र सरकार की योजनाओं पर लगा ग्रहण अजब गजब चर्चा

मिर्ज़ापुर / लालगंज -जनपद मिर्ज़ापुर एवं लालगंज में डबल इंजन सरकार को खुली चुनौती जिला राज पंचायत और ग्राम प्रधान की मिली भगत या जनता के हक पर खुलेआम डाका जी हां हम बात कर रहे हैं, जनपद मिर्ज़ापुर लालगंज ब्लाक के अन्तर्गत ग्राम पंचायत रामपुरवसीतदली ग्राम प्रधान हफीज़ अहमद के कार्यशैली पर सवालिया निशाना साधा रही जनता जनता के कथित तौर पर हाफीज़ अहमद अब तक पांच वर्षों से लगातार प्रधान की कुर्सी को सम्हाल रहें हैं लेकिन विकास और योजना सिर्फ कागजों तक ही सीमित है लगातार हाफीज़ अहमद प्रधान के खिलाफ जनता में सवाल का उठता तूफान अब उच्च अधिकारी को कटघरे में खड़ा कर दिया है आखिर राज्य सरकार और केंद्र सरकार की योजना सिर्फ कागजों तक ही सीमित है या धरातल पर कुछ है ।
पांच वर्ष के कार्यकाल को लेकर भी उठ रहे सवाल
ग्राम पंचायत रामपुरवसीतदली के ग्राम प्रधान हफीज अहमद के कार्यकाल को लेकर भी ग्रामीणों के बीच तरह-तरह की चर्चाएं होने की बात सामने आ रही है। ग्रामीणों का आरोप है कि लंबे समय से पंचायत की जिम्मेदारी संभालने के बावजूद गांव में विकास कार्यों को लेकर अपेक्षित पारदर्शिता दिखाई नहीं दे रही है।
हालांकि इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि होना अभी बाकी है। इसके बावजूद ग्रामीणों द्वारा उठाए जा रहे सवालों को देखते हुए संबंधित विभाग के अधिकारियों के स्तर से पंचायत में स्वीकृत योजनाओं, खर्च की गई धनराशि, पूर्ण कराए गए कार्यों और मौके पर उनकी वास्तविक स्थिति की जांच कराया जाना महत्वपूर्ण हो जाता है।
कागज और जमीन के बीच कितना अंतर?
सबसे बड़ा सवाल यही है कि पंचायत के अभिलेखों में जिन विकास कार्यों को पूर्ण अथवा प्रगतिशील बताया गया है, उनकी वास्तविक स्थिति मौके पर क्या है?
यदि किसी कार्य के लिए सरकारी धनराशि स्वीकृत हुई है तो उसका कार्यस्थल कहां है? कार्य की लागत कितनी है? कार्य कब स्वीकृत हुआ? कब शुरू हुआ और कब पूरा हुआ? संबंधित कार्य की गुणवत्ता की जांच किस अधिकारी ने की? भुगतान किस आधार पर किया गया? ग्राम पंचायत की बैठकों में इन कार्यों को किस प्रकार प्रस्तुत किया गया? और सबसे महत्वपूर्ण—क्या ग्रामीणों को उन योजनाओं का वास्तविक लाभ मिला?
इन सवालों का जवाब पंचायत के दस्तावेजों और मौके पर किए गए भौतिक सत्यापन से ही स्पष्ट हो सकता है।
जिला पंचायत राज विभाग की भूमिका भी सवालों के घेरे में
ग्राम पंचायत से जुड़े मामलों में केवल ग्राम प्रधान की भूमिका ही नहीं, बल्कि संबंधित पंचायत सचिव, खंड विकास स्तर के अधिकारी तथा जिला पंचायत राज विभाग की निगरानी व्यवस्था भी महत्वपूर्ण होती है।
ग्रामीणों की ओर से यदि किसी योजना में अनियमितता, कार्य की गुणवत्ता, भुगतान, लाभार्थी चयन अथवा विकास कार्यों के धरातल पर न होने की शिकायत की जाती है तो संबंधित अधिकारियों की जिम्मेदारी बनती है कि शिकायत की जांच कर वास्तविक स्थिति सामने लाई जाए।
ऐसे में रामपुरवसीतदली में उठ रहे सवालों के बीच जिला पंचायत राज अधिकारी कार्यालय की निगरानी व्यवस्था पर भी सवाल खड़े होना स्वाभाविक है। यदि पंचायत में सब कुछ नियमों के अनुरूप हुआ है तो अभिलेख, स्वीकृतियां, भुगतान विवरण और मौके का सत्यापन स्थिति को स्पष्ट कर सकते हैं। वहीं यदि किसी स्तर पर नियमों का उल्लंघन पाया जाता है तो जिम्मेदारी निर्धारित करने की कार्रवाई भी विभागीय स्तर पर की जानी चाहिए।
सरकारी योजनाओं का उद्देश्य आखिर किसके लिए?
केंद्र और राज्य सरकार की योजनाओं का मूल उद्देश्य ग्रामीण क्षेत्रों में बुनियादी सुविधाओं को मजबूत करना और पात्र लोगों तक सरकारी योजनाओं का लाभ पहुंचाना है। ग्राम पंचायतें इस व्यवस्था की सबसे निचली और महत्वपूर्ण इकाई हैं। इसलिए पंचायत स्तर पर पारदर्शिता और जवाबदेही का सीधा संबंध ग्रामीण जनता के हित से जुड़ा है।
ग्रामीणों का कहना है कि यदि किसी योजना के नाम पर अभिलेखों में कार्य पूर्ण दिखाया गया है, लेकिन मौके पर उसका अपेक्षित लाभ दिखाई नहीं देता, तो इसकी निष्पक्ष जांच होनी चाहिए। इसी तरह यदि योजनाओं का लाभ पात्र लोगों को नहीं मिल रहा है तो लाभार्थी चयन की प्रक्रिया की भी समीक्षा आवश्यक है।
ग्रामीणों की मांग—जांच हो और स्थिति सार्वजनिक की जाए
ग्रामीणों के बीच उठ रहे सवालों के बीच अब मांग की जा रही है कि पंचायत में पिछले वर्षों में कराए गए प्रमुख विकास कार्यों और सरकारी योजनाओं का निष्पक्ष परीक्षण कराया जाए। ग्रामीणों का कहना है कि जांच केवल कागजी अभिलेखों तक सीमित न रहकर मौके पर जाकर की जानी चाहिए, ताकि वास्तविक स्थिति सामने आ सके।
ग्रामीणों के अनुसार जांच में यह भी स्पष्ट किया जाना चाहिए कि पंचायत को विभिन्न योजनाओं के तहत कितनी धनराशि प्राप्त हुई, किस मद में कितनी राशि खर्च की गई, कौन-कौन से कार्य स्वीकृत हुए, कितने कार्य पूर्ण हुए और वर्तमान समय में उनकी वास्तविक स्थिति क्या है।
सवाल कई, जवाब का इंतजार
रामपुरवसीतदली को लेकर सामने आ रही चर्चाओं ने एक बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है—क्या ग्राम पंचायत में विकास कार्य वास्तव में धरातल पर उतरे हैं या सरकारी अभिलेखों में दर्ज प्रगति ही विकास की तस्वीर बनकर रह गई है?
फिलहाल यह सवाल जांच का विषय है। आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि किए बिना किसी व्यक्ति को दोषी ठहराना उचित नहीं होगा। लेकिन ग्रामीणों द्वारा लगातार सवाल उठाए जाने की स्थिति में संबंधित विभाग की जिम्मेदारी बढ़ जाती है कि वह तथ्यों को सामने लाए।
अब निगाहें इस बात पर हैं कि जिला पंचायत राज विभाग और लालगंज विकासखंड प्रशासन इन शिकायतों और सवालों को किस गंभीरता से लेता है तथा क्या पंचायत के विकास कार्यों का स्थलीय निरीक्षण कर वास्तविक स्थिति सार्वजनिक की जाती है।
जनता के सवालों का जवाब आरोपों से नहीं, बल्कि अभिलेखों, भौतिक सत्यापन और पारदर्शी जांच से मिलना चाहिए।
रामपुर वासितदली कि कहानी शेष अगले अंक में।










