आयुर्वेदउतराखंड

बेल्जियम के घेंट शहर में वर्ल्ड हार्ट डे पर आयोजित वर्कशॉप में उत्तराखंड के अंतरराष्ट्रीय आयुर्वेद विशेषज्ञ चिकित्सक डॉ डी. के. श्रीवास्तव ने यूरोप के सभी विशेषज्ञों को संबोधित किया

ऋषिकेश। यूरोप के देश बेल्जियम के घेंट शहर में वर्ल्ड हार्ट डे पर आयोजित वर्कशॉप में उत्तराखंड के अंतरराष्ट्रीय आयुर्वेद विशेषज्ञ एवं नवजीवनम् आयुर्वेदा संस्थान के प्रमुख चिकित्सक डॉ डी के श्रीवास्तव ने यूरोप के सभी विशेषज्ञों को संबोधित करते हुए कहा कि world Heart Day का आयुर्वेद का वैज्ञानिक संदेश यही है कि
“हृदय की रक्षा केवल दवा से नहीं, बल्कि सही आहार, नियमित गतिविधि, मानसिक संतुलन, पर्याप्त नींद और समय पर आधुनिक चिकित्सा के समन्वय से होती है।  हृदय केवल रक्त पंप करने वाला अंग नहीं है; यह हमारे शारीरिक स्वास्थ्य, मानसिक संतुलन और जीवनशैली से गहराई से जुड़ा है। आयुर्वेद हजारों वर्षों से हृदय (हृदय) को शरीर और मन दोनों के लिए महत्वपूर्ण केंद्र मानता आया है। महर्षि महेश योगी के ट्रांज़िडेंटल मैडिटेशन ग्रुप द्वारा आयोजित इस कार्यक्रम में यूरोप के चिकित्सक , अल्टरनेटिव हीलर और वैज्ञानिकों ने भाग लिया डॉ डी के श्रीवास्तवा ने कहा कि आयुर्वेद का उद्देश्य स्वस्थ जीवन की रक्षा करना है—और आधुनिक cardiology के साथ उसका सुरक्षित, evidence-based integration रोगी के लिए सबसे महत्वपूर्ण होना चाहिए।”हृदय रोगों में आयुर्वेदिक उपचार को वैज्ञानिक और सुरक्षित तरीके से “integrative/supportive care” के रूप में समझना चाहिए। खासकर coronary artery disease, heart attack, stent या bypass के बाद कभी कभी आयुर्वेदिक औषधियाँ कार्डियोलॉजिस्ट की दवाओं का विकल्प नहीं हैं।डॉ श्रीवास्तव ने कहा की मन पर नियंत्रण करने की टेक्नीक हमे सीखने की जरूरत है जिससे मन के साथ हृदय भी तनाव फ्री और आनंदित बना रहे सम्पूर्ण स्वास्थ्य हमारे शरीर मन और आत्मा एकरूपता पर ही संभव है आयुर्वेद के सिद्धांत हमे सौ वर्षों तक निरोगी रखने के लिए ही बनाये गए है !
आयुर्वेद में हृदय को स्रोतसों का महत्वपूर्ण स्थान तथा चेतना, मन और ओज से संबंधित महत्वपूर्ण अंग माना गया है। हृदय की कार्यक्षमता को बनाए रखने के लिए वात, पित्त और कफ का संतुलन, उचित अग्नि, स्वस्थ धातु-पोषण और मन का संतुलन महत्वपूर्ण माना जाता है।
आयुर्वेदिक दृष्टि से हृदय-सम्बन्धी समस्याओं में व्यक्ति की प्रकृति, विकृति, आहार, दिनचर्या, मानसिक तनाव, नींद, पाचन और चयापचय का समग्र मूल्यांकन किया जाता है।

1. आधुनिक चिकित्सा के साथ समन्वय

हृदय रोग में पहले यह निर्धारित करना आवश्यक है कि समस्या क्या है:

 Coronary artery disease

 Angina

 Previous myocardial infarction

 Hypertension

 Heart failure

 Arrhythmia

 Dyslipidemia

 Diabetes/obesity से जुड़ा cardiovascular disease

1. आहार — हृदय सुरक्षा का आधार

आयुर्वेदिक पथ्य को आधुनिक cardiovascular nutrition के साथ जोड़ा जा सकता है:
अधिक लें

 सब्जियाँ और मौसमी फल

 साबुत अनाज

 दालें और legumes

उचित मात्रा में nuts/seeds

 पर्याप्त protein

कम वसा वाले/उपयुक्त dairy विकल्प, यदि सहन हों

 पर्याप्त पानी

सीमित करें

अत्यधिक नमक

चीनी और sugary drinks

 deep-fried foods

 trans-fat/ultra-processed foods

अत्यधिक saturated fat

 अत्यधिक alcoholआधुनिक विज्ञान भी यह स्पष्ट करता है कि उच्च रक्तचाप, मधुमेह, धूम्रपान, अस्वास्थ्यकर आहार, शारीरिक निष्क्रियता और तनाव जैसे कारक हृदय रोग के जोखिम को प्रभावित करते हैं। इसलिए आयुर्वेद की प्रिवेंटिव और लाइफस्टाइल-आधारित सोच आज के समय में महत्वपूर्ण स्वास्थ्य संदेश देती है।

याद रखें: हृदय की सुरक्षा किसी एक दिन का संकल्प नहीं, बल्कि हर दिन की स्वस्थ आदतों का परिणाम है।

❤️ Eat wisely. Move regularly. Sleep adequately. Manage stress. Protect your heart.

आयुर्वेद के वैज्ञानिक दृष्टिकोण से व्यक्ति को diabetes, kidney disease, obesity या heart failure होने पर diet अलग से निर्धारित करनी चाहिए।

1. योग, प्राणायाम और ध्यान

उचित व्यक्ति में physician-guided cardiac rehabilitation के साथ:

 धीमी गति से योगासन

 अनुलोम-विलोम

 mindfulness/ध्यान

 relaxation techniques

नियमित walking

तनाव और sedentary lifestyle को कम करने में सहायक हो सकते हैं।
लेकिन acute heart attack, unstable angina या decompensated heart failure में व्यायाम/प्राणायाम स्वयं से शुरू नहीं करना चाहिए।
आयुर्वेदिक औषधियाँ
कुछ पारंपरिक द्रव्यों पर cardiovascular और metabolic effects के संदर्भ में वैज्ञानिक शोध उपलब्ध है, जैसे:

 Arjuna (Terminalia arjuna)

 Ashwagandha (Withania somnifera)

Garlic (Allium sativum)

 Guggulu preparations

 कुछ classical Hridaya formulations

लेकिन यहाँ सबसे महत्वपूर्ण बात है कि “हृदय के लिए उपयोगी” और “heart disease को ठीक करने वाली सिद्ध दवा” एक ही बात नहीं है।
विशेषकर Arjuna या अन्य herbal formulations को stent की blockage खोलने, coronary plaque हटाने या prescribed antiplatelet/statin therapy को replace करने के रूप में हमेशा प्रस्तुत नहीं करना चाहिए।
⚠️ Stent वाले मरीजों में विशेष सावधानी
Aspirin, clopidogrel/ticagrelor, anticoagulants, statins, BP medicines या अन्य cardiac drugs के साथ herbal medicines लेने पर drug–herb interactions और bleeding/BP/glucose effects हो सकते हैं।

1. आयुर्वेद का मुख्य लक्ष्य

हृदय रोगों में आयुर्वेद की सबसे मजबूत व्यावहारिक भूमिका इस दिशा में रखी जा सकती है:
आहार → दिनचर्या → व्यायाम → तनाव नियंत्रण → नींद → वजन/मेटाबोलिक स्वास्थ्य → चिकित्सकीय उपचार का पालन
अर्थात् रोग होने के बाद केवल औषधि खोजने के बजाय cardiovascular risk factors को लंबे समय तक नियंत्रित करना।

Related Articles

Back to top button
error: Content is protected !!