उत्तर प्रदेशजनहित

79 अंत्योदय कार्ड सत्यापन में खंड विकास अधिकारी का झूठा आश्वासन जनता में चर्चा का माहौल

रामपुर वासितदली ग्राम पंचायत में 79 अंत्योदय कार्ड सत्यापन प्रक्रिया हेतु उच्च अधिकारी एवं खंड विकास अधिकारी द्वारा लीपापोती का आरोप

 

मिर्ज़ापुर लालगंज -मिर्ज़ापुर जनपद में 79 अंत्योदय कार्ड धारकों के सत्यापन प्रक्रिया में उच्च अधिकारी की लापरवाही और जनता में अजब-गजब चर्चा और आरोप प्रत्यारोप का सिलसिला जारी । जी हां हम बात कर मिर्ज़ापुर लालगंज ब्लाक अन्तर्गत रामपुर वासितदली ग्राम पंचायत की जहां 79 अंत्योदय कार्ड के सत्यापन प्रक्रिया में सहायक पंचायत अधिकारी द्वारा तीन दिवसीय नोटिस जारी करके प्रधान एवं कोटेदार द्वारा रिसिविंग कराया गया था , लेकिन ग्राम पंचायत प्रधान की दबंगई ने सरकारी उच्च अधिकारी के आदेशों की खुलेआम चुनौती दे डाली तीन दिवसीय नोटिस का जवाब एक माह में कोई स्पष्टीकरण जवाब नहीं दिया और सरकार के मंसूबे पर पानी फेर रहें हैं । जहां एक तरफ केन्द्र सरकार और राज्य द्वारा जनता के हित में हर कदम तत्परता दिखा रही हैं वहीं दूसरी तरफ उच्च अधिकारी और ग्राम प्रधान द्वारा जनता के हक और कमिशन के चक्कर में सरकार को खुलेआम चुनौती दे रहें हैं।

सरकारी योजनाओं का लाभ वास्तविक पात्रों तक पहुंचाने और अपात्र लाभार्थियों को योजना से बाहर करने के लिए शासन-प्रशासन लगातार पारदर्शिता और निष्पक्ष जांच के दावे करता है। लेकिन जब सरकारी आदेशों के अनुपालन और उनकी निगरानी की जिम्मेदारी संभालने वाले अधिकारियों की कार्यप्रणाली पर ही सवाल उठने लगें, तो आम जनता का व्यवस्था से भरोसा डगमगाने लगता है। ऐसा ही एक मामला मिर्जापुर जनपद के लालगंज विकासखंड अंतर्गत ग्राम पंचायत रामपुर वासितदली से सामने आया है, जहां 79 अंत्योदय कार्डों के सत्यापन का मामला अब तक सवालों के घेरे में बना हुआ है।

 

खंड विकास अधिकारी का आश्वासन भी सवालों के घेरे में

मामले को प्रिंट मीडिया के माध्यम से प्रमुखता से उठाए जाने के बाद ग्रामीणों की समस्या खंड विकास अधिकारी के संज्ञान में लाई गई थी। बताया जाता है कि खंड विकास अधिकारी ने 79 अंत्योदय कार्डों के सत्यापन के मामले को गंभीरता से लेते हुए टीम गठित कर जांच कराने तथा पात्रता की वास्तविक स्थिति सामने लाने का आश्वासन दिया था।

इस आश्वासन से ग्रामीणों में उम्मीद जगी थी कि अब लंबे समय से लंबित सत्यापन प्रक्रिया आगे बढ़ेगी और यदि किसी स्तर पर अनियमितता पाई जाती है तो नियमानुसार कार्रवाई भी होगी।

लेकिन ग्रामीणों का आरोप है कि आश्वासन मिलने के बाद भी धरातल पर कोई स्पष्ट प्रगति दिखाई नहीं दी। न तो जांच टीम की कार्रवाई सार्वजनिक हुई और न ही 79 अंत्योदय कार्डों के सत्यापन को लेकर कोई ठोस जानकारी सामने आई।

यही वजह है कि अब ग्रामीणों के बीच खंड विकास अधिकारी के आश्वासन की कार्यप्रणाली को लेकर तरह-तरह की चर्चाएं हो रही हैं। जनता जानना चाहती है कि आखिर जांच कराने का आश्वासन केवल औपचारिकता बनकर क्यों रह गया?

सहायक पंचायत अधिकारी के आदेशों की अनदेखी पर क्या होगी कार्रवाई?

इस पूरे प्रकरण में एक और महत्वपूर्ण सवाल ग्राम पंचायत के ग्राम प्रधान की जिम्मेदारी को लेकर खड़ा हो रहा है। यदि सहायक पंचायत अधिकारी द्वारा तीन दिवसीय नोटिस जारी किया गया था और निर्धारित समय में उसका अनुपालन नहीं हुआ, तो क्या उच्च अधिकारी इस मामले को गंभीरता से लेते हुए संबंधित ग्राम प्रधान से जवाब-तलब करेंगे?

क्या नोटिस के अनुपालन में लापरवाही या आदेशों की अवहेलना की पुष्टि होने पर संबंधित ग्राम प्रधान के विरुद्ध नियमानुसार उचित कार्रवाई की जाएगी? या फिर यह मामला भी अन्य प्रशासनिक मामलों की तरह फाइलों में दबकर रह जाएगा?

यह भी स्पष्ट होना आवश्यक है कि नोटिस का जवाब दिया गया या नहीं, सत्यापन की जिम्मेदारी किस अधिकारी या कर्मचारी को सौंपी गई और अब तक कार्रवाई आगे क्यों नहीं बढ़ पाई।

 

जनता के हक का सवाल, जवाबदेही किसकी?

अंत्योदय योजना का मूल उद्देश्य समाज के सबसे गरीब और जरूरतमंद परिवारों को खाद्यान्न सुरक्षा उपलब्ध कराना है। ऐसे में 79 अंत्योदय कार्डों की पात्रता का मामला केवल एक ग्राम पंचायत तक सीमित नहीं है, बल्कि यह सरकारी योजनाओं की पारदर्शिता और वास्तविक पात्रों के अधिकारों से जुड़ा हुआ है।

यदि किसी कार्ड पर अपात्र व्यक्ति लाभ प्राप्त कर रहा है, तो नियमानुसार जांच कर आवश्यक कार्रवाई होनी चाहिए। वहीं दूसरी ओर, किसी वास्तविक जरूरतमंद परिवार का अधिकार प्रभावित नहीं होना चाहिए। इसलिए सत्यापन प्रक्रिया निष्पक्ष, पारदर्शी और अभिलेखों के आधार पर होना बेहद जरूरी है।

ग्रामीणों के बीच यह भी सवाल उठ रहा है कि आखिर जब शासन की मंशा पात्र परिवारों तक योजनाओं का लाभ पहुंचाने की है, तो स्थानीय स्तर पर सत्यापन प्रक्रिया में इतनी देरी क्यों हो रही है? क्या अधिकारियों की निगरानी व्यवस्था प्रभावी है? और क्या जिम्मेदार जनप्रतिनिधियों एवं संबंधित कर्मचारियों की जवाबदेही तय की जाएगी?

उच्च अधिकारियों से ग्रामीणों की मांग

ग्राम पंचायत रामपुर वासितदली के ग्रामीणों की मांग है कि 79 अंत्योदय कार्डों की निष्पक्ष जांच के लिए तत्काल सक्षम अधिकारियों की टीम गठित कर मौके पर सत्यापन कराया जाए। जांच में अपात्रता या किसी प्रकार की अनियमितता सामने आने पर नियमानुसार कार्रवाई सुनिश्चित की जाए।

इसके साथ ही सहायक पंचायत अधिकारी द्वारा जारी तीन दिवसीय नोटिस के अनुपालन की भी जांच होनी चाहिए। यदि ग्राम प्रधान या संबंधित जिम्मेदार व्यक्ति की ओर से सरकारी आदेशों की अवहेलना अथवा नोटिस की अनदेखी प्रमाणित होती है, तो उच्च अधिकारी उस पर भी उचित संज्ञान लेकर नियमानुसार कार्रवाई करें।

अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या खंड विकास अधिकारी अपने दिए गए आश्वासन को धरातल पर उतारकर रामपुर वासितदली के 79 अंत्योदय कार्डों का सत्यापन कराएंगे? क्या सहायक पंचायत अधिकारी के आदेशों की अनदेखी के मामले में दोषी पाए जाने वाले ग्राम प्रधान पर भी कार्रवाई होगी? या फिर जांच और कार्रवाई का यह पूरा मामला केवल आश्वासनों तक सीमित रहकर ठंडे बस्ते में चला जाएगा?

फिलहाल ग्रामीणों की निगाहें खंड विकास अधिकारी से लेकर जिला प्रशासन के उच्च अधिकारियों तक टिकी हुई हैं। जनता जवाब चाहती है और अब इंतजार केवल आश्वासन का नहीं, बल्कि निष्पक्ष जांच और ठोस कार्रवाई का है।

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