
सांसद त्रिवेंद्र सिंह रावत, अनिल बलूनी व विधायक मदन कौशिक
देहरादून। उत्तराखंड भाजपा के वरिष्ठ नेता और गदरपुर विधायक अरविंद पांडे इन दिनों प्रदेश की राजनीति के केंद्र में हैं। किसान सुखवंत सिंह आत्महत्या मामले में सीबीआई जांच की मांग, इसके बाद प्रशासन की ओर से भूमि अतिक्रमण हटाने का नोटिस और फिर भाजपा के दिग्गज नेताओं की प्रस्तावित बैठक इन सभी घटनाओं ने सियासी तापमान बढ़ा दिया है।
इसी बीच अब गदरपुर में होने वाली भाजपा नेताओं की अहम बैठक को रद्द कर दिया गया है। सूत्रों के अनुसार केंद्रीय नेतृत्व के हस्तक्षेप के बाद यह फैसला लिया गया।
पूर्व मुख्यमंत्री व हरिद्वार सांसद त्रिवेंद्र सिंह रावत, गढ़वाल सांसद अनिल बलूनी और हरिद्वार विधायक मदन कौशिक को हेलीकॉप्टर से गदरपुर जाकर अरविंद पांडे से मुलाकात करनी थी। यह बैठक करीब एक घंटे की प्रस्तावित थी और इसे बेहद अहम माना जा रहा था।
जैसे ही यह कार्यक्रम सोशल मीडिया पर सामने आया, वैसे ही राजनीतिक गलियारों में कई तरह के कयास लगने लगे। हालांकि पूरे प्रकरण ने तूल पकड़ने के बाद यह कार्यक्रम फिलहाल टाल दिया गया है और तीनों नेता हरिद्वार में ही रुकेंगे। दरअसल, गदरपुर विधायक अरविंद पांडे काशीपुर के किसान सुखवंत सिंह आत्महत्या मामले को लेकर लगातार मुखर हैं। उन्होंने इस मामले में सीबीआई जांच की मांग की थी।
इसके कुछ ही समय बाद जिला प्रशासन ने उन पर भूमि अतिक्रमण का आरोप लगाते हुए 15 दिनों के भीतर अतिक्रमण हटाने का नोटिस जारी कर दिया। नोटिस विधायक के आवास स्थित कथित कैंप कार्यालय पर चस्पा किया गया, जिसके बाद उनके समर्थकों में भारी नाराजगी देखने को मिली। अरविंद पांडे ने आरोपों को निराधार बताते हुए कहा है कि यह कार्रवाई राजनीतिक दबाव में की गई है। उन्होंने साफ कहा कि यदि भ्रष्ट अधिकारियों की वजह से कोई किसान या आम आदमी आत्महत्या करने को मजबूर होता है, तो वे उसके खिलाफ आवाज उठाते रहेंगे, चाहे इसकी कोई भी कीमत क्यों न चुकानी पड़े। पांडे का यह भी कहना है कि नोटिस की आड़ में गरीब और वर्षों से बसे लोगों को डराया जा रहा है।
इस पूरे घटनाक्रम के बीच भाजपा के भीतर भी बेचौनी साफ नजर आ रही है। एक ओर प्रशासनिक कार्रवाई जारी है, तो दूसरी ओर पार्टी के वरिष्ठ नेताओं की प्रस्तावित मुलाकात और फिर उसका रद्द होना कई सियासी संकेत दे रहा है। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि यदि यह बैठक होती, तो इसे मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की सरकार से नाराज नेताओं की लामबंदी के रूप में देखा जाता। संभवतः इसी आशंका के चलते केंद्रीय नेतृत्व ने समय रहते हस्तक्षेप किया।
उल्लेखनीय है कि अरविंद पांडे भाजपा के कद्दावर नेताओं में गिने जाते हैं। वे त्रिवेंद्र सिंह रावत सरकार में कैबिनेट मंत्री रह चुके हैं और गदरपुर से लगातार पांचवीं बार विधायक हैं। 2022 में जीत के बावजूद उन्हें धामी मंत्रिमंडल में जगह नहीं मिली थी। इससे पहले भी वे अंकिता भंडारी हत्याकांड और अन्य मुद्दों पर सरकार से अलग रुख अपनाकर सुर्खियों में रहे हैं। फिलहाल अतिक्रमण नोटिस, किसान आत्महत्या मामला और भाजपा के अंदरूनी समीकरण तीनों ने मिलकर उत्तराखंड की राजनीति को गरमा दिया है। अब सबकी निगाहें इस पर टिकी हैं कि आने वाले दिनों में पार्टी और सरकार इस पूरे विवाद को किस दिशा में ले जाती है।












