उतराखंडकला

निर्मल आश्रम ज्ञानदान अकादमी में भारतीय शास्त्रीय संगीत की मनमोहक प्रस्तुति

ऋषिकेश। निर्मल आश्रम ज्ञानदान अकादमी में भारतीय शास्त्रीय संगीत का एक भव्य एवं सुरम्य आयोजन संपन्न हुआ, जिसमें देश के ख्यातिप्राप्त कलाकारों ने अपनी अद्भुत प्रस्तुतियों से समस्त वातावरण को संगीत की मधुर लहरियों से सराबोर कर दिया।

कार्यक्रम में ‘अजराड़ा घराना’ के विश्वविख्यात तबला वादक उस्ताद अकरम खान ने तबले की विलक्षण थापों से उपस्थित श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर दिया। उनके साथ ‘मुरादाबाद घराना’ के प्रसिद्ध सारंगी वादक सुभानअली खाँ ने अपनी सारंगी की मधुर धुनों से ऐसा समां बांधा कि पूरा सभागार तालियों की गड़गड़ाहट से गूंज उठा। तबला और सारंगी की जुगलबंदी ने विद्यार्थियों, शिक्षकों एवं संगीत प्रेमियों को भारतीय शास्त्रीय संगीत की समृद्ध परंपरा से साक्षात्कार कराया।

विद्यालय ऑडिटोरियम में आयोजित इस सांस्कृतिक कार्यक्रम में विद्यालय समन्वयक सोहन सिंह कैंतुरा, परीक्षा प्रमुख सुश्री सरवजीत कौर, स्कूल कप्तान सोनल डोभाल एवं अमरीश शुक्ला ने पुष्पगुच्छ भेंट कर अतिथियों एवं कलाकारों का स्वागत किया।

कार्यक्रम का शुभारंभ विद्यालय संरक्षक परम पूज्य संत जोध सिंह महाराज, एन.जी.ए. डायरेक्टर स. गुरविंदर सिंह, चेयरमैन डॉ. एस.एन. सूरी, श्रीमती रेनू सूरी एवं भाई हँसबीर सिंह के साथ दीप प्रज्ज्वलित कर किया।

इसके पश्चात विद्यालय कोयर ग्रुप ने संगीताचार्य स. गुरजिंदर सिंह एवं तबला वादक प्रदीप जी के मार्गदर्शन में मूल मंत्र, गायत्री मंत्र तथा दैनिक प्रार्थना “हे गोविंद, हे गोपाल” प्रस्तुत कर आध्यात्मिक वातावरण का सृजन किया। मंच संचालन माही शर्मा एवं वैष्णवी कोठियाल ने किया। उन्होंने भारतीय संगीत की महत्ता पर प्रकाश डालते हुए कलाकारों का परिचय एवं विद्यालय की उपलब्धियों का उल्लेख किया।

उस्ताद अकरम खान एवं सुभानअली खाँ ने विभिन्न रागों की प्रस्तुति देकर भारतीय संगीत की गहराई एवं सौंदर्य को जीवंत कर दिया। विशेष रूप से राग पहाड़ी पर आधारित तीन ताल की लहरा ने श्रोताओं को भावविभोर कर दिया। तबले की थाप एवं सारंगी के सुरों के माध्यम से कलाकारों ने प्रकृति के विविध रूपों — बहते जल, वर्षा की बौछार एवं बादलों की गूंज — का अद्भुत सजीव चित्रण प्रस्तुत किया।

कार्यक्रम के दौरान उस्ताद अकरम खान ने अपने आत्मीय एवं सुविख्यात तबला वादक स्वर्गीय उस्ताद साबिर खान साहब (फर्रुखाबाद घराना) को तबले एवं सारंगी के सुरों के माध्यम से भावपूर्ण श्रद्धांजलि अर्पित की तथा उनकी आत्मा की शांति की प्रार्थना की। यह क्षण सभी उपस्थित जनों के लिए अत्यंत भावुक एवं प्रेरणादायी रहा।

अपने संबोधन में उस्ताद अकरम खान ने कहा कि संगीत का संबंध सदैव संत परंपरा से रहा है। उन्होंने संत जोध सिंह महाराज के समक्ष प्रस्तुति देना अपना परम सौभाग्य बताया तथा अपनी सफलता का संपूर्ण श्रेय अपने गुरुजनों को दिया। उन्होंने कहा कि “यदि शीश कटाकर भी श्रेष्ठ गुरु मिल जाएँ, तो वह भी सस्ता सौदा है।”

संगीत प्रस्तुति के उपरांत परम पूज्य महाराज ने सीबीएसई बोर्ड परीक्षा 2025-26 में नगर स्तर पर प्रथम एवं राज्य स्तर पर स्थान प्राप्त करने वाली विद्यालय की प्रतिभाशाली छात्रा इशिता सिंह को स्नेहाशीष एवं उपहार प्रदान कर सम्मानित किया। साथ ही उस्ताद अकरम खान, उनकी धर्मपत्नी श्रीमती तरन्नुम खान एवं सुभानअली खाँ को सिरोपा एवं विद्यालय स्मृति-चिह्न भेंट कर सम्मानित किया गया।

कार्यक्रम के अंत में एन.जी.ए. संगीत अध्यापिका श्रीमती दीपमाला कोठियाल ने सभी कलाकारों, अतिथिगणों एवं सहयोगियों का आभार व्यक्त किया। उन्होंने विशेष रूप से सभी व्यवस्थाओं को सफलतापूर्वक संपन्न कराने हेतु स. हरमन सिंह के योगदान की सराहना की।

इस अवसर पर दून इंटरनेशनल स्कूल प्रधानाचार्या श्रीमती तनुजा पोखरियाल, एन.डी.एस. प्रधानाचार्या श्रीमती ललिता कृष्णास्वामी, अवतार कौर, बाबू आत्मप्रकाश, तकनीकी प्रबंधक कुलदीप सिंह रावत, राकेश, दिनेश शर्मा, अशोक जोशी, स. अमनदीप सिंह जी, विभिन्न विद्यालयों से आए संगीत अध्यापक संतोष पांचाल एवं सोमनाथ निर्मल, कार्यालय समन्वयक विनोद बिजल्वाण, वरिष्ठ खेल प्रशिक्षक दिनेश पैन्यूली सहित समस्त शिक्षक एवं कर्मचारीगण उपस्थित रहे।

 

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