उतराखंडजनहित

*मेहंदी की रस्म में कॉकटेल के नाम पर बेवजह लाखों का खर्चा ना करें*

देहरादून। सामाजिक संगठन लोक पंचायत के सदस्य एवं विधानसभा के पूर्व सूचना अधिकारी भारत चौहान ने कहा कि शादी से पहले मेहंदी की रस्म में आज लाखों रुपए खर्च किए जा रहे हैं जो कॉकटेल, शराब कबाब पर मेहंदी के रस्म का बहाना बनाकर और देखा देखी में यह सब हो रहा है। जो सभ्य समाज के लिए उचित नहीं है।
जौनसार बावर समाज में शादियों के अनेक रूप हैं प्राचीन समय की बात करें तो उस समय भी विभिन्न प्रकार की शादियां होती थी परंतु वर्तमान समय में जिस प्रकार से शहरों में शादियों का विकृत रूप हुआ है वह भविष्य के लिए अच्छे संकेत नहीं है। देखा – देखी में शादी से पहले मेहंदी की रस्म में ही शराब और कबाब पर लाखों रुपए लुटाए जाते हैं।
उन्होंने कहा कि वैसे तो जौनसार बावर क्षेत्र जनजाति क्षेत्र है और हम लोगों को जनजाति इसलिए घोषित किया गया था कि यह क्षेत्र अत्यंत पिछड़ा हुआ था यहां की सांस्कृतिक धरोहर, रहन-सहन और रीति रिवाज अन्य समाज से अलग थे वह सभी मान्यताएं बनी रहें इसलिए जौनसार बावर क्षेत्र को अन्य समाज से अलग जनजाति का लाभ दिया गया। और इस लाभ को प्राप्त करने के लिए हम किसी भी हद तक जाने को तैयार रहते हैं परंतु बाहर के समाज की देखा – देखी में जो बदलाव जौनसार बावर में आ रहे हैं वह अच्छे संकेत नहीं है।
भारत चौहान ने कहा कि समाज का एक तपका ऐसा है जिन्हें अपनी रोजमर्रा की दिनचर्या में रोजी-रोटी कपड़ा और छत तक ही नसीब है, जबकि बाहर के जनजातियों में यह सब भी नहीं हैं।
वर्तमान समय में जिस प्रकार से विवाह से पहले मेहंदी की रस्म में बेइंतहा खर्च किया जा रहा है वह शायद उचित नहीं है किसी को तो आगे आकर रोक लगानी ही पड़ेगी। विवाह के मौसम में विकासनगर, हरबर्टपुर, जीवनगढ़ आदि के वेडिंग पॉइंट ऐसे गुलजार रहते हैं जैसे मानो स्वर्ग धरती पर उतर आया हो। जितना खर्च शादी में होता है उससे अधिक खर्च मेहंदी की रस्म में हो जाता है।
लोगो से अपील करते हुए कहा कि एक बात जरूर अच्छी है कि मेहंदी के रस्म में जौनसार बावर की महिलाएं अपने पारंपरिक घाघरा, कुर्ती ढांटू और पारंपरिक स्वर्ण जड़ित आभूषणों से सुसज्जित होकर पहुंचती है वह संस्कृति के संरक्षण और प्रचार प्रसार का अच्छा प्रयास है। परंतु गाड़ी पार्किंग करते हुए यह ध्यान जरूर रखें कि हम सहारनपुर के मुहाने पर है कहीं लूटेरा हाथ साफ ना कर जाए।
दूसरा शगुन के रूप में जो धनराशि भेंट की जाती है उसकी भी एक निश्चित सीमा होनी चाहिए क्योंकि शादी के बाद उस शगुन की धनराशि को वापस भी लौटाना होता है यदि सामान्य परिवार में बहुत अधिक धनराशि हमने शगुन के रूप में दी है तो उसे लौटाने में भी उस परिवार के सदस्यों को कठिनाई होती है। यह भी ध्यान रखना चाहिए।
चौहान ने कहा कि विगत वर्ष मैंने एक लेख लिखा था जिसमें विकासनगर क्षेत्र में जौनसार बावर के लोगों ने करीब 100 करोड़ से अधिक रुपया शादी में खर्च किया था। इस धनराशि में से यदि हम कुछ अंश निकाल कर उस नवदंपति के लिए कोई रोजगार खड़ा करने में लगा देते तो निश्चित रूप से उस नवदंपति जोड़े को भविष्य के लिए एक रोजगार का आधार मिल जाता।

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