
देहरादून।भाजपा राष्ट्रीय सहकोषाध्यक्ष एवं सांसद राज्यसभा डा. नरेश बंसल ने अतारांकित प्रश्न के अंतर्गत सदन के माध्यम से सरकार से
‘‘बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ’’ का संस्थागत विकास और महिलाओं का शैक्षिक सशक्तीकरण के संबंध मे प्रश्न किया।
डा. नरेश बंसल ने जानना चाहा कि क्या महिला एवं बाल विकास मंत्री यह बताने की कृपा करेंगे कि-
क- ‘‘बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ’’ के शुभारंभ के बाद से जन्म के समय लिंगानुपात और स्कूली शिक्षा में लडकियों के सकल नामांकन अनुपात में क्या मात्रात्मक सुधार दर्ज किया गया है।
ख- माध्यमिक एवं उच्चतर शिक्षा में बालिकाओं की निरंतरता बढ़ाने के उद्देश्य से शिक्षा एवं स्वास्थ्य संबंधी हस्तक्षेपों के अभिसरण को सुनिश्चित करने के लिए अपनाई गई कार्यनीतिक रूपरेखा क्या है।
ग- क्या कम बाल लिंगानुपात वाले जिलों में सामुदायिक जन सक्रियता अभियानों तथा व्यवहार परिवर्तन संचार कार्यनीतियों को और अधिक सघन किया जा रहा है। और
घ- यदि हां तो तत्संबंधी ब्यौरा क्या है।
इस महत्वपूर्ण प्रश्न के उत्तर मे माननीय महिला एवं बाल विकास राज्य मंत्री श्रीमती सावित्री ठाकुर ने जवाब दिया कि-ः
क से घ- ‘‘बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ’’ योजना बाल लिंगानुपात (सीएसआर) तथा बालिकाओं एवं महिलाओं के सशक्तीकरण से संबंधित मुद्दों का समाधान करने मे सहायता करती है। यह योजना 22 जनवरी, 2015 को महिला एवं बाल विकास मंत्रालय, शिक्षा मंत्रालय, तथा स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय के संयुक्त प्रयास के रूप में प्रारंभ की गई थी। इसका उद्देश्य भेदभाव आधारित लिंग चयन को रोकना, बालिकाओं का अस्तित्व एवं संरक्षण सुनिश्चित करना तथा उनकी शिक्षा को बढ़ावा देना है।
यह योजना विभिन्न हितधारकों को सूचित, प्रभावित, प्रेरित, शामिल करके और सशक्त बनाकर बालिका के प्रति मानसिकता और व्यवहार में परिवर्तन लाने का प्रयास करती है।
15वें वित्त आयोग की अवधि में, मिशन शक्ति के संबल वर्टिकल के एक घटक के रूप में बीबीबीपी का विस्तार किया गया है ताकि बहुक्षेत्रीय कार्यकलापों के माध्यम से देश के सभी जिलों को शामिल किया जा सके जिससे बुनियादी स्तर पर प्रभाव डालने वाली गतिविधियों पर अधिक खर्च को बढ़ावा मिल सके। बीबीबीपी सरकारी एजेंसियों, मीडिया, नागरिक समाज एवं व्यापक पैमाने पर जनता सहित विभिन्न हितधारकों को एकजुट करके एक नीतिगत पहल से एक राष्ट्रीय आंदोलन में परिवर्तित हो गई है। बेटी बचाओ बेटी पढाओं का मुख्य उद्देश्य देश भर में बालिकाओं के प्रति लोगों की सोच में व्यवहारिक एवं सामाजिक परिवर्तन लाना है। ‘‘बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ’’एक केंद्र प्रायोजित योजना है और केंद्र सरकार द्वारा राज्यों एवं संघ राज्य क्षेत्रों को 100 प्रतिशत वित्तीय सहायता प्रदान की जाती है। योजना के समग्र कार्यान्वयन का दायित्व राज्य सरकारों एवं संघ राज्य क्षेत्र प्रशासन का है। इस योजना के समग्र कार्यान्वयन की जिम्मेदारी राज्य सरकार और संघ राज्य क्षेत्र प्रशासन की है।
स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय की स्वास्थ्य प्रबंधन सूचना प्रणाली (एचएमआईएस) की नवीनतम रिपोर्टों के अनुसार, जन्म के समय लिंगानुपात (एसआरबी) राष्ट्रीय स्तर पर वर्ष 2014-15 में 918 से बढ़कर 2025-26 में 929 (अनंतिम) हो गया है। शिक्षा मंत्रालय ने यूडीआईएसई आंकडों के अनुसार, विद्यालयों में माध्यमिक स्तर पर बालिकाओं का सकल नामांकन अनुपात राष्ट्रीय स्तर पर वर्ष 2014-15 में 75.51 प्रतिशत से बढ़कर वर्ष 2025-26 में 83.4 प्रतिशत हो गया है।
‘‘बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ’’ योजना के अंतर्गत, हितधारक मंत्रालयों के बीच समन्वय को मजबूत करने तथा बुनियादी स्तर पर प्रभावी कार्यान्वयन सुनिश्चित करने के लिए 11 अक्टूबर, 2022 को मानकीकृत प्रचालन नियमावली जारी की गई थी। ‘‘बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ’’ प्रचालन नियमावली में बालिका के संरक्षण एवं सशक्तिकरण हेतु एकजुट समन्वित प्रयास सुनिश्चित करने के लिए सभी संबंधित हितधारकों हतु गतिविधियों एवं प्रक्रियाओं का विस्तृत विवरण दिया गया है। प्रचालन नियमावली जारी की गई थी। बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ प्रचालन नियमावली में बालिका के संरक्षण एवं सशक्तिकरण हेतु एकजुट समन्वित प्रयास सुनिश्चित करने के लिए सभी संबंधित हितधारकों हेतु गतिविधियों एवं प्रक्रियाओं का विस्तृत विवरण दिया गया है। प्रचालन नियमावली में बालिका के समग्र विकास के लिए और बालिकाओं, उनके परिवारों एवं समुदायों की वर्ष भर सहभागिता सुनिश्चित करने हेतु माह-वार विशिष्ट विषयों के साथ जिला स्तर पर सुझाए गए समन्वित कार्यकलापों हेतु एक विषयगत कैलेंडर सम्मिलित है।
शिक्षा मंत्रालय के साथ सहयोग के तहत की जाने वाली गतिविधियों में विद्यालयों में बालिकाओं के लिए कार्यशील शौचालय सुनिश्चित करना, लैंगिक-संवेदनशील शिक्षा के संबंध में अध्यापकों को प्रशिक्षण देना, बालकों और बालिकाओं के बीच लैंगिक समानता को बढ़ाना, करियर परामर्श और जीवन कौशल शिक्षा देना, बालिकाओं के लिए आत्मरक्षा प्रशिक्षण आयोजित करना तथा शिक्षण संस्थाओं में सेनिटरी नेपकिन उपलब्ध करना, शामिल है। विज्ञान मेलों, प्रदर्शनियों, परिचयात्मक (एक्सपोजर) दौरों तथा अन्य शिक्षण गतिविधियों के माध्यम से विज्ञान तथा व्यावसायिक शिक्षा में बालिकाओं की प्रतिभागिता बढ़ाने के भी प्रयास किए जाते हैं।
स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय के साथ सहयोग के तहत की जाने वाली गतिविधियों में पोषण एवं स्वास्थ्य, मासिक धर्म स्वच्छता के संबंध में जागरूकता प्रसार, किशोरियों में रक्ताल्पता (एनीमिया) की रोकथाम, राष्ट्रीय किशोर स्वास्थ्य कार्यक्रम को सुदृढ़ करना, विद्यालय स्वास्थ्य प्रचारक (एम्बसडर) पहल का कार्यान्वयन, व्यापक यौन शिक्षा पर जागरूकता प्रसार सत्र आयोजित करना तथा समुदायों को गर्भधारत-पूर्व एवं प्रसव-पूर्व नैदानिक तकनीक (पीसीपीएनडीटी) अधिनियम और गर्भ का चिकित्सीय समापन (एमटीपी) अधिनियम के बारे में जागरूक करना शामिल है।






