उतराखंडनेत्र दान

41वें नेत्रदान पखवाड़े में परिवारों की जागरूकता बनी प्रेरणा

ऋषिकेश।समाज में नेत्रदान के प्रति जागरूकता निरंतर बढ़ रही है। कॉर्नियल अंधत्व से पीड़ित लोगों को नई रोशनी देने के उद्देश्य से प्रतिवर्ष नेत्रदान पखवाड़ा मनाया जाता है। इस वर्ष 25 अगस्त से 8 सितंबर 2026 तक 41वाँ नेत्रदान पखवाड़ा मनाया जा रहा है। इस अवसर पर हरिद्वार-ऋषिकेश क्षेत्र में नेत्रदान के प्रति जनजागरूकता बढ़ाने के लिए विभिन्न संस्थाओं एवं कार्यकर्ताओं द्वारा निरंतर प्रयास किए जा रहे हैं।

नेत्रदान महादान हरिद्वार-ऋषिकेश के दृष्टिदूतों के आग्रह और प्रयासों से अनेक परिवार अपने प्रियजनों के निधन के बाद नेत्रदान का संकल्प पूरा कर समाज के सामने प्रेरणादायी उदाहरण प्रस्तुत कर रहे हैं।

नेत्रदान कार्यकर्ता एवं लायंस क्लब ऋषिकेश देवभूमि के चार्टर अध्यक्ष गोपाल नारंग ने बताया कि हरिद्वार निवासी हरनारायण आहूजा ने अपनी पत्नी के निधन के बाद पहले उनका नेत्रदान कराया और उसके पश्चात अपनी पुत्री को इसकी सूचना दी, ताकि भावनात्मक स्थिति के कारण वह नेत्रदान के लिए मना न कर दे, वहीं जब उनका निधन हुआ तो उनकी पुत्री ने स्वयं भावुक होकर नेत्रदान के लिए आग्रह किया। यह परिवार नेत्रदान के प्रति जागरूकता और दृढ़ संकल्प का अनूठा उदाहरण है।

इसी प्रकार, लायन ललित नारायण मिश्रा के कहने पर जिस टक्कर परिवार ने पूर्व में श्रीमती प्रकाश टक्कर का नेत्रदान कराया था, उसी परिवार ने गत मंगलवार को प्रिंस मनचंदा के निवेदन पर नम आँखों से विनोद टक्कर का भी मृत्योपरांत नेत्रदान कराया। यह दर्शाता है कि एक परिवार की जागरूकता किस प्रकार आने वाली पीढ़ियों तक नेत्रदान की प्रेरणा पहुंचा सकती है।

इसी क्रम में, पूर्व में अपनी दादी एवं पिता का नेत्रदान करा चुके गुलशन नारंग ने अपनी माता श्रीमती कविता नारंग का नेत्रदान कराकर पारिवारिक जागरूकता की मिसाल पेश की। वहीं, नजफगढ़, दिल्ली निवासी कृष्ण कालरा, जिनके परिवार में पहले भी नेत्रदान कराया जा चुका है, ने श्रीमती सरला अरोड़ा के निधन के बाद उनका नेत्रदान कराकर एक जागरूक नागरिक होने का संदेश दिया।

पूर्व अध्यापक भुवनेश्वर आनंद कुकरेती के निधन पर भी उनके परिजनों ने पिता के देहदान के साथ-साथ नेत्रदान का संकल्प पूरा किया। यह पहल समाज में देहदान और नेत्रदान के महत्व को समझने की दिशा में एक महत्वपूर्ण उदाहरण है।

नेत्रदान के प्रति जागरूकता फैलाने वाले विभिन्न कार्यकर्ताओं के प्रयासों से भी कई परिवारों ने अपने प्रियजनों का नेत्रदान कराया। रोटेरियन सुरेश सूरी के आग्रह पर दिनेश रामपाल, लायन राजेश अग्रवाल के आग्रह पर अवतार सिंह, हरिद्वार निवासी अनिल अरोड़ा के आग्रह पर ईशा नारंग, तथा प्रेमनगर निवासी अमित भाटिया के आग्रह पर श्रीमती मनजीत भारद्वाज और राज भाटिया के परिजनों ने नेत्रदान कर समाज के सामने प्रेरणादायी उदाहरण प्रस्तुत किया।

समाज में नेत्रदान के प्रति जागरूकता का अलख जगाने वाले रामशरण चावला के इस मिशन के अंतर्गत अब तक 480 व्यक्तियों का नेत्रदान कराया जा चुका है। यह अभियान निरंतर जारी है और इसका उद्देश्य अधिक से अधिक लोगों को नेत्रदान के लिए प्रेरित करना तथा कॉर्नियल अंधत्व के विरुद्ध समाज में जागरूकता बढ़ाना है।

41वें नेत्रदान पखवाड़े के अवसर पर इन परिवारों की पहल हमारे लिए प्रेरणा स्रोत हैं कि नेत्रदान केवल दो आँखों का दान नहीं, बल्कि किसी के जीवन में नई रोशनी और नई उम्मीद देने का संकल्प है।

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