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दून की इलेक्ट्रिक बसों के चक्के हुए जाम

ड्राइवरों की हड़ताल के चलते हुए रूका बसों का संचालन

देहरादून। स्मार्ट सिटी के तहत शहर में चल रही 30 इलेक्ट्रिक बसों का संचालन ड्राइवरों की हड़ताल के चलते ठप है। चार से पांच ड्राइवरों पर कार्रवाई के बाद शुरू हुआ विवाद अब बस संचालन, कर्मचारियों की नौकरी, वेतन और थर्ड पार्टी कंपनी से लेकर स्मार्ट सिटी प्रोजेक्ट की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर रहा है।
स्मार्ट और आधुनिक शहर बनाने के लिए शुरू किया गया स्मार्ट सिटी प्रोजेक्ट अब अपने अंतिम दौर में है। लेकिन प्रोजेक्ट के तहत शुरू की गई कई सुविधाओं की स्थिति सवालों के घेरे में है। इनमें शहर की ग्रीन पब्लिक ट्रांसपोर्ट व्यवस्था भी शामिल है। स्मार्ट सिटी के तहत करीब तीन साल से निजी कंपनी के माध्यम से संचालित हो रही 30 इलेक्ट्रिक बसों के पहिए फिलहाल थम गए हैं। बसें अलग-अलग रूट पर आम लोगों को सार्वजनिक परिवहन की सुविधा देने के बजाय आएसबीटी ट्रांसपोर्ट नगर में कंपनी के कार्यालय पर खड़ी हैं।
इलेक्ट्रिक बसों का संचालन बंद होने की तत्काल वजह ड्राइवरों की हड़ताल बताई जा रही है। कर्मचारियों का आरोप है कि कुछ ड्राइवरों को अचानक नौकरी से हटाए जाने के बाद विवाद बढ़ा और इसके विरोध में सभी रूट की बसों का संचालन रोक दिया गया। वहीं, देहरादून स्मार्ट सिटी के अपर मुख्य कार्यकारी अधिकारी तीरथ पाल सिंह का कहना है कि कुछ ड्राइवरों के खिलाफ अनुशासनहीनता का मामला सामने आया था। इसी आधार पर कार्रवाई की गई। हालांकि, स्मार्ट सिटी प्रबंधन का कहना है कि मामले में दोनों पक्षों की बात सुनी जा रही है और उसके बाद ही अंतिम निर्णय लिया जाएगा।
कर्मचारियों का दावा है कि मामला सिर्फ अनुशासनहीनता तक सीमित नहीं है। उनका कहना है कि बस संचालन करने वाली कंपनी में लंबे समय से कई तरह की समस्याएं चली आ रही हैं। इनमें कर्मचारियों को समय पर वेतन नहीं मिलने से लेकर अचानक नौकरी से हटाने और बसों के संचालन में कथित अनियमितताएं शामिल हैं।
देहरादून स्मार्ट सिटी के तहत वर्ष 2021 से 30 इलेक्ट्रिक बसों का संचालन किया जा रहा है। इसके लिए निजी कंपनी मअमलजतंदे को जिम्मेदारी दी गई थी। अब कर्मचारियों का आरोप है कि बस संचालन लगातार घाटे में चल रहा है और इसके बावजूद व्यवस्था को जारी रखा जा रहा है। कर्मचारियों का कहना है कि शहर के कुछ रूट पर बसों में पर्याप्त यात्री नहीं मिलते, जबकि कई रूट पर बसें खाली या कम यात्रियों के साथ चलती हैं। ऐसे में सवाल उठ रहा है कि आखिर जिस ग्रीन पब्लिक ट्रांसपोर्ट व्यवस्था को शहर की परिवहन जरूरतों को पूरा करने और निजी वाहनों का दबाव कम करने के लिए शुरू किया गया था, वह आर्थिक रूप से टिकाऊ क्यों नहीं बन पाई।
बस कर्मचारियों का आरोप है कि स्थानीय लोगों से काम कराने के बावजूद उन्हें कई बार वेतन के लिए इंतजार करना पड़ता है। कर्मचारियों का कहना है कि कंपनी की कार्यप्रणाली को लेकर उन्होंने स्मार्ट सिटी प्रशासन से शिकायत भी की है। हटाए गए ड्राइवरों में शामिल गुलशन का कहना है कि मुझे और मेरे साथियों को अचानक काम से हटा दिया गया। इसके बाद संबंधित रूट की बसों का संचालन भी प्रभावित हुआ। जब कर्मचारियों की समस्याओं का समाधान नहीं हुआ तो ड्राइवरों ने सामूहिक रूप से सभी रूट की बसों का संचालन रोक दिया।
इस पूरे विवाद में सबसे गंभीर आरोप बसों के संचालन के लिए जिम्मेदार कंपनी और उसके द्वारा इस्तेमाल की जा रही कथित थर्ड पार्टी व्यवस्था को लेकर सामने आया है। कर्मचारी नेता बन्देश नौटियाल का दावा है कि  जिन बसों के संचालन की जिम्मेदारी स्मार्ट सिटी ने एक कंपनी को दी थी, उसका संचालन सीधे उसी कंपनी द्वारा नहीं किया जा रहा, बल्कि किसी दूसरी थर्ड पार्टी कंपनी के माध्यम से कराया जा रहा है। हमने इस मामले को लेकर जिलाधिकारी आशीष चौहान से भी मुलाकात की।
बन्देश का आरोप है कि बातचीत के दौरान यह बात सामने आई कि बस संचालन में थर्ड पार्टी की भूमिका है। हालांकि, स्मार्ट सिटी के अधिकारियों की ओर से इस संबंध में जानकारी होने से इनकार किए जाने का दावा कर्मचारी नेता ने किया है। बन्देश नौटियाल के मुताबिक, करीब पांच ड्राइवरों के साथ बड़ी संख्या में परिचालकों को भी अचानक हटाया गया है। उनका आरोप है कि कई रूट पर बसें अपेक्षित यात्रियों के बिना चल रही हैं और व्यवस्था में कई स्तर पर अनियमितताएं हैं।

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