उतराखंडनिर्वाचन आयोग
कुमाऊं कमिश्नर और नैनीताल विधायक को मिला एसआईआर का नोटिस सरिता आर्या ने पता बदलने को बताया कारण

नैनीताल। निर्वाचन आयोग के विशेष गहन पुनरीक्षण अभियान के तहत इन दिनों जिले में घर-घर जाकर मतदाता सत्यापन का कार्य किया जा रहा है। इसी अभियान के दौरान एक दिलचस्प मामला सामने आया है। आम नागरिकों की तरह कुमाऊं आयुक्त दीपक रावत, नैनीताल विधायक सरिता आर्या समेत शहर के कई प्रमुख लोगों के आवास पर भी एसआईआर के नोटिस पहुंचे हैं।
नैनीताल विधायक सरिता आर्या के आवास पर पहुंचे नोटिस में उनके और छोटे बेटे से आवश्यक जानकारी उपलब्ध कराने को कहा गया है। वहीं कुमाऊं आयुक्त दीपक रावत के आवास पर भी सत्यापन प्रक्रिया के तहत नोटिस पहुंचाया गया। इसके अलावा शहर के अन्य प्रतिष्ठित नागरिकों के घरों पर भी एसआईआर के नोटिस वितरित किए गए हैं।
नैनीताल विधायक सरिता आर्या ने कहा कि पहले 2003 में मैं यहां नगर पालिका अध्यक्ष थी तो मेरे पते में नैनीताल लिखा था। अब उसमें भूमियाधार जुड़ गया है तो उसी में नोटिस आया है। मुझे और मेरे छोटे बेटे को नोटिस भेजा गया था। मैंने अपने साक्ष्य दे दिए हैं। पते को लेकर थोड़ी दिक्कत थी। पुराने पते को ले लिया गया था। अन्य लोगों को भी नोटिस आए हैं। कमिश्नर साहब को भी आया है। एसआईआर जो काम हो रहा है उसमें ठीक करा लेना है। सभी लोग अपने डॉक्यूमेंट्स जमा करवाएं और त्रुटियां ठीक करवा लें।
निर्वाचन आयोग के निर्देशानुसार, चल रहे इस अभियान का उद्देश्य मतदाता सूची को शुद्ध, अपडेट और त्रुटिरहित बनाना है। इसके तहत बूथ लेवल अधिकारी घर-घर जाकर मतदाताओं का सत्यापन कर रहे हैं और आवश्यक जानकारी प्राप्त कर रहे हैं। जिले में यह अभियान सभी मतदाताओं पर समान रूप से लागू किया जा रहा है, चाहे वे आम नागरिक हों या किसी संवैधानिक अथवा प्रशासनिक पद पर आसीन व्यक्ति।
निर्वाचन विभाग के अधिकारियों का कहना है कि अभियान पूरी तरह नियमित प्रक्रिया का हिस्सा है। इसका उद्देश्य प्रत्येक पात्र मतदाता का सही विवरण सुनिश्चित करना है। इसी कारण जिले के सभी परिवारों तक पहुंच रहे हैं और निर्धारित प्रपत्रों के माध्यम से जानकारी एकत्र की जा रही है।
नैनीताल एसडीएम नवाजिश खालिक ने बताया कि नैनीताल विधानसभा क्षेत्र में एसआईआर में दी गई शिकायतों पर सुनवाई शुरू हो चुकी है ताकि जो कमियां हैं, उन्हें दूर किया जा सके। अधिकांश मामले नाम और पते की त्रुटियों को लेकर हैं। सभी लोगों से दस्तावेज मांगे गए हैं। एसआईआर का उद्देश्य नई और दुरुस्त मतदाता सूची को बनाना है। जिन लोगों के नाम और पते में गलतियां आ रही हैं, उनको ऑटोमेटिकली सिस्टम के द्वारा पकड़ा जा रहा। सभी को नोटिस जारी कर कमियों को दूर करने को कहा है। कई लोगों की आपत्तियों का निस्तारण को हो गया है।
गौर हो कि इन दिनों उत्तराखंड में एसआईआर का काम चल रहा है। 14 जुलाई से फॉर्म-6, फॉर्म-7 और फॉर्म-8 भरने की प्रक्रिया जारी है। ये प्रक्रिया 13 अगस्त तक चलनी है। इस दौरान सभी पात्र नागरिक अपने दावे और आपत्तियां दर्ज करा सकते हैं। निर्वाचन विभाग का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि अंतिम प्रकाशित होने वाली मतदाता सूची पूरी तरह शुद्ध और अपडेटेड हो।
मतदाताओं के लिए जरूरी जानकारी
उत्तराखंड के अपर मुख्य निर्वाचन अधिकारी विजय कुमार जोगदंडे ने 30 जुलाई को बताया था कि मतदाता सूची में नाम, पता, उम्र या अन्य जानकारियों में किसी प्रकार की गलती होने पर संबंधित मतदाता फॉर्म-8 भरकर संशोधन करा सकते हैं। जिन पात्र नागरिकों का नाम अभी तक मतदाता सूची में शामिल नहीं हैं, वे फॉर्म-6 के माध्यम से नया पंजीकरण करा सकते हैं। यदि किसी नाम को हटाने या किसी अन्य आपत्ति से संबंधित मामला है, तो उसके लिए फॉर्म-7 का प्रावधान है।
19 लाख वोटर्स को नोटिस भेजने की प्रक्रिया शुरू
विजय कुमार जोगदंडे ने बताया प्रदेश में अब तक करीब 19 लाख ऐसे मतदाताओं की पहचान की गई है, जिनके रिकॉर्ड में किसी न किसी प्रकार की त्रुटि पाई गई है। इन मतदाताओं को चरणबद्ध तरीके से नोटिस जारी किए जा रहे हैं। जिससे वे निर्धारित समय के भीतर आवश्यक दस्तावेजों के साथ अपना पक्ष रख सकें और रिकॉर्ड में सुधार कराया जा सके। उन्होंने कहा अभियान के दौरान अभी भी करीब 5.26 लाख मतदाताओं की मैपिंग नहीं हो पाई है। इन मतदाताओं तक पहुंचने और उनकी जानकारी का सत्यापन करने के लिए बूथ लेवल अधिकारियों के माध्यम से लगातार प्रयास किए जा रहे हैं। विभाग का लक्ष्य है कि सभी मतदाताओं का सत्यापन समय पर पूरा हो और कोई भी पात्र मतदाता सूची से बाहर न रह जाए।










