
पौड़ी में 2.31 हेक्टेयर वन क्षेत्र का वनाग्नि से हुआ नुकसान
पौड़ी गढ़वाल। उत्तराखंड में जैसे-जैसे गर्मी का प्रकोप बढ़ रहा है, वैसे ही उत्तराखंड के जंगल भी धधकने लगे है। इस साल फायर सीजन की शुरुआत को राहत भरी रही, लेकिन जंगलों में वनाग्नि का तांडव दिखने लगा है। पौड़ी गढ़वाल जिले की श्रीनगर रेंज में सुमाड़ी और आसपास के जंगलों में इस वक्त भीषण आग लगी हुई है। तेज हवाओं के कारण वनाग्नि ने विकराल रूप ले लिया है। फिलहाल वन विभाग की टीम आग को काबू करने में लगी हुई है।
बताया जा रहा है कि जंगलों में लगी आग पर पहले वन विभाग ने काबू पा लिया था, लेकिन फिर कुछ शरारती तत्वों ने जंगलों में आग लगा दी, जिससे स्थिति और भयावह हो गई। मामले की गंभीरता को देखते हुए खुद डीएफओ पौड़ी पवन नेगी अपनी टीम के साथ मौके पर पहुंचे और आग पर काबू पाने के प्रयासों का नेतृत्व किया।
डीएफओ पवन नेगी के अनुसार वनाग्नि की अब तक कुल 4 घटनाएं सामने आई हैं, जिनमें तीन सिविल क्षेत्र और एक वन पंचायत क्षेत्र से जुड़ी हैं। इन घटनाओं में लगभग 2.31 हेक्टेयर वन क्षेत्र को नुकसान पहुंचा है। इसके अलावा 15 घटनाएं नाप खेतों में भी हुईं, जहां वन विभाग की टीम ने समय रहते आग बुझाने का कार्य किया। वन विभाग ने लोगों से अपील की है कि जंगलों में आग न लगाएं और किसी भी संदिग्ध गतिविधि की तुरंत सूचना दें, ताकि समय रहते बड़ी घटनाओं को रोका जा सके।
दरअसल, उत्तराखंड में हर साल 15 फरवरी से लेकर 15 जून तक का समय फायर सीजन का होता है। इस दौरान जंगलों में आग लगने की घटनाएं सबसे ज्यादा सामने आती है। हालांकि फरवरी, मार्च और अप्रैल में बारिश व बर्फबारी के कारण जंगलों में नमी बनी रही थी। इसीलिए आग की घटनाएं ना के बराबर थीं, लेकिन बीते कुछ दिनों से पौड़ी और आसपास के क्षेत्रों में जंगलों में आग लगने की घटनाएं लगातार बढ़ने लगी हैं। डीएफओ पौड़ी पवन नेगी ने जानकारी देते हुए बताया कि अब हालात बदल रहे हैं और आग की घटनाएं सामने आ रही हैं, जिन पर काबू पाने के लिए विभाग पूरी तरह सक्रिय है।
उन्होंने कहा कि वन विभाग की टीमें पूरी तत्परता के साथ काम कर रही हैं और वे स्वयं भी घटनास्थल पर पहुंचकर हालात का जायजा ले रहे हैं। अधिकांश आग की घटनाएं नाप भूमि और खेतों के आसपास सामने आ रही हैं, जहां तुरंत कार्रवाई की जा रही है।
डीएफओ पौड़ी गढ़वाल पवन नेगी के मुताबिक एनआईटी और सुमाड़ी क्षेत्र में कुछ शरारती तत्वों द्वारा आग लगाने की घटनाएं भी सामने आई हैं, जिन पर लंबे प्रयासों के बाद काबू पाया गया। डीएफओ ने बताया कि पूरे जनपद में 6 रेंजों में 36 क्रू स्टेशन बनाए गए हैं, जहां फायर वॉचर्स तैनात किए गए हैं। वन विभाग की पूरी टीम जंगलों को सुरक्षित रखने के लिए लगातार निगरानी और कार्रवाई में जुटी हुई है।












