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जल सुरक्षा के लिए युवाओं को बनना होगा बदलाव का वाहक

एसआरएचयू में राष्ट्रीय सेमिनार, विशेषज्ञों ने जल एवं स्वच्छता के अधिकार के साथ सतत जल शासन पर किया मंथन

डोईवाला। स्वामी राम हिमालयन विश्वविद्यालय के वाटर एंड सैनिटेशन (वाटसन) विभाग ने राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (एनएचआरसी) नई दिल्ली के सहयोग से जल एवं स्वच्छता का अधिकार- हिमालयी क्षेत्र में सुजलाम और सतत जल शासन के लिए युवाओं की भागीदारी विषय पर एक दिवसीय राष्ट्रीय सेमिनार आयोजित किया। जिसमें विशेषज्ञों ने जल एवं स्वच्छता के अधिकार को सुनिश्चित करने के लिए नीतियों और कानूनों के साथ युवाओं की सक्रिय भागीदारी पर जोर दिया।

आदि कैलाश कार्यक्रम आयोजित कार्यक्रम को में  एसआरएचयू के महानिदेशक (शैक्षणिक) डॉ. विजेन्द्र चौहान ने सुरक्षित पेयजल को मानवाधिकार का महत्वपूर्ण हिस्सा बताते हुए ’’सतत विकास लक्ष्य-6 की महत्ता पर प्रकाश डाला।
कुलपति डॉ. राजेंद्र डोभाल ने जल सुरक्षा और जल गुणवत्ता से जुड़ी पहलों पर प्रकाश डालते हुए रिवर बैंक फिल्ट्रेशन तथा जल गुणवत्ता परीक्षण जैसे प्रयासों की जानकारी दी। उन्होंने हिमालयी क्षेत्र में भू-जनित प्रदूषण से उत्पन्न चुनौतियों पर भी चर्चा की।
उत्तराखंड मानवाधिकार आयोग के सदस्य हरि चंद सेमवाल ने कहा कि सुरक्षित जल और स्वच्छता के लिए सामाजिक जागरूकता के साथ सामुदायिक भागीदारी जरूरी है। उन्होंने कहा कि केवल शौचालय निर्माण से स्वच्छता सुनिश्चित नहीं होती, बल्कि उचित अपशिष्ट प्रबंधन भी आवश्यक है। उन्होंने महिलाओं के स्वास्थ्य, गरिमा और निजता से जुड़े स्वच्छता के पहलुओं के साथ ग्रे-वॉटर प्रबंधन और जल पुनर्भरण पर जोर दिया।
उत्तराखंड राज्य महिला आयोग की अध्यक्ष कुसुम कंडवाल ने मानवाधिकार, सामाजिक न्याय और पर्यावरण संरक्षण के बीच संबंधों को रेखांकित किया। वहीं राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग की महानिदेशक (अन्वेषण) अनुपमा निलेकर चंद्रा ने ऑनलाइन माध्यम से मुख्य अतिथि के रूप में संबोधित करते हुए कहा कि जल मानवाधिकारों की आधारभूत आवश्यकता है और सम्मानजनक जीवन के लिए स्वच्छता भी उतनी ही आवश्यक है। उन्होंने हिमालयी क्षेत्र में बढ़ती जल कमी के मद्देनजर प्राकृतिक जल स्रोतों के संरक्षण, वैज्ञानिक दृष्टिकोण और प्रभावी जमीनी क्रियान्वयन पर जोर दिया। सेमिनार में विश्वविद्यालय के विभिन्न संस्थानों के छात्र-छात्राओं के साथ जल एवं स्वच्छता, मानवाधिकार, पर्यावरण, प्रशासन और शिक्षा क्षेत्र के विशेषज्ञों ने भाग लिया।
जल शासन और जल सुरक्षा पर विशेषज्ञों ने रखे विचार
इस दौरान आयोजित पैनल विमर्श में डी.पी. गैरोला, डॉ. ए. शरीफ, प्रशांत कुमार राय और प्रो. एच.पी. उनियाल’’ ने जल एवं स्वच्छता के अधिकार, जल सुरक्षा, जल संरक्षण और जल शासन से जुड़े विषयों पर विचार रखे। तकनीकी सत्र में डॉ. तरुणा गौतम, डी.के. सिंह, डॉ. प्रशांत सिंह’ तथा डॉ. रमेश बडोला ने समुदाय आधारित जल प्रबंधन, जल सुरक्षा और युवाओं की भागीदारी पर चर्चा की। दूसरे पैनल विमर्श में पद्मश्री कल्याण सिंह रावत, आशुतोष त्रिपुरारी सिंह, डॉ. राजीव बिजल्वाण, डॉ. गरिमा कपूर तथा नितेश कौशिक ने युवा नेतृत्व, नवाचार, तकनीक और सतत जल शासन पर विचार साझा किए। जलवायु अनुकूलन, जल सुरक्षा एवं सतत जल प्रबंधन पर तकनीकी सत्र में डॉ. अविनाश चंद्र जोशी, द्वारिका प्रसाद सेमवाल, डॉ. विनोद कोठारी, निखिल पंत, डॉ. गौरव तथा नितेश कौशिक ने जलवायु अनुकूल वाटरशेड प्रबंधन, जल सुरक्षा, सामुदायिक स्तर पर पर्यावरण संरक्षण, पारंपरिक ज्ञान, स्प्रिंगशेड विकास और सतत जल प्रबंधन जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर विचार-विमर्श किया।

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