कुर्सी एक, जिम्मेदारियां कई… चार साल से अतिरिक्त प्रभार! लालगंज की पंचायत व्यवस्था पर उठे गंभीर सवाल”
चार साल से अतिरिक्त प्रभार, अब करोड़ों के कथित खेल पर सवाल!

लालगंज ब्लॉक में एडीओ पंचायत की जिम्मेदारी संभाल रहे सचिव अजय शंकर को लेकर उठे गंभीर सवाल, शिकायतों और खबरों के बाद भी कार्रवाई न होने पर जिला पंचायत राज विभाग व ब्लॉक प्रशासन की कार्यप्रणाली कटघरे में
मिर्जापुर/लालगंज। लालगंज ब्लॉक की 53 ग्राम पंचायतों में विकास योजनाओं, पात्रता आधारित सरकारी लाभ और पंचायत व्यवस्था को लेकर एक बार फिर सवाल खड़े होने लगे हैं। सूत्रों से मिली जानकारी और स्थानीय स्तर पर उठ रही चर्चाओं के अनुसार, लंबे समय से अतिरिक्त प्रभार पर चल रही व्यवस्थाओं तथा योजनाओं के क्रियान्वयन में कथित अनियमितताओं को लेकर ग्रामीणों के बीच तरह-तरह की चर्चाएं हैं। सबसे बड़ा सवाल यह है कि यदि लगातार शिकायतें और आरोप सामने आ रहे हैं तो संबंधित उच्च अधिकारियों द्वारा अब तक इसकी गंभीरता से जांच क्यों नहीं कराई गई?
बताया जा रहा है कि लालगंज ब्लॉक में सचिव अजय शंकर लंबे समय से एडीओ पंचायत का अतिरिक्त दायित्व भी संभाल रहे हैं। सूत्रों के अनुसार, उनके पास एडीओ पंचायत की जिम्मेदारी के साथ-साथ दो क्लस्टरों का अतिरिक्त कार्यभार भी रहा है। यदि यह व्यवस्था लंबे समय से चली आ रही है तो सवाल उठना स्वाभाविक है कि इतने महत्वपूर्ण दायित्वों की नियमित समीक्षा किस स्तर पर की गई और संबंधित अधिकारियों ने पंचायतों में चल रहे कार्यों तथा योजनाओं की कितनी गहन निगरानी की?
खबर प्रकाशित होने के बाद भी कार्रवाई का इंतजार
लालगंज ब्लॉक में एडीओ पंचायत एवं सचिव अजय शंकर की कार्यप्रणाली को लेकर हाल में प्रमुखता से खबर प्रकाशित की गई थी। खबर के माध्यम से ग्रामीण क्षेत्र में उठ रहे सवालों, अतिरिक्त प्रभार और पंचायत स्तर की व्यवस्थाओं को लेकर संबंधित अधिकारियों का ध्यान आकर्षित किया गया। इसके बावजूद अब तक किसी ठोस जांच या सार्वजनिक रूप से स्पष्ट कार्रवाई की जानकारी सामने नहीं आने से लोगों के बीच चर्चा और तेज हो गई है।
ग्रामीणों का कहना है कि यदि आरोप निराधार हैं तो विभागीय जांच कर स्थिति स्पष्ट की जानी चाहिए और यदि कहीं अनियमितता पाई जाती है तो जिम्मेदार लोगों पर नियमानुसार कार्रवाई होनी चाहिए। आखिर शिकायतों और सवालों के बीच चुप्पी क्यों है—यह सवाल अब आम लोगों के बीच चर्चा का विषय बनता जा रहा है।
जिला पंचायत राज विभाग की निगरानी पर भी उठे सवाल
मामला केवल एक अधिकारी या कर्मचारी के अतिरिक्त प्रभार तक सीमित नहीं है। पंचायत विभाग से जुड़ी योजनाओं की निगरानी और समीक्षा की जिम्मेदारी उच्च अधिकारियों की भी होती है। ऐसे में सवाल यह है कि यदि किसी सचिव के पास वर्षों से अतिरिक्त दायित्व रहा, तो उसकी कार्यप्रणाली, ग्राम पंचायतों में योजनाओं की प्रगति, भुगतान प्रक्रिया, पात्र लाभार्थियों का चयन और विकास कार्यों की गुणवत्ता की नियमित समीक्षा किस स्तर पर हुई?
ग्रामीणों की मांग है कि लालगंज ब्लॉक की ग्राम पंचायतों में पिछले कई वर्षों के विकास कार्यों और लाभार्थीपरक योजनाओं की निष्पक्ष जांच कराई जाए। साथ ही जिन योजनाओं में सरकारी धन खर्च हुआ है, उनके अभिलेख, कार्यस्थल और लाभार्थियों का सत्यापन कराया जाए, ताकि वास्तविक स्थिति सामने आ सके।
अंत्योदय योजना को लेकर भी उठे गंभीर सवाल
इसी बीच अंत्योदय राशन कार्ड योजना को लेकर भी सवाल सामने आए हैं। सूत्रों के अनुसार, कुछ ऐसे लाभार्थियों को योजना का लाभ दिए जाने की चर्चा है, जिनकी पात्रता पर सवाल उठाए जा रहे हैं। साथ ही यह भी आरोप/चर्चा है कि कुछ मामलों में पात्रता निर्धारण और प्रस्ताव की प्रक्रिया को लेकर नियमों का पालन नहीं किया गया।
यदि किसी अपात्र व्यक्ति को अंत्योदय योजना का लाभ मिला है अथवा पात्र व्यक्ति को लाभ से वंचित किया गया है, तो यह बेहद गंभीर विषय है। ऐसे मामलों में केवल आरोप-प्रत्यारोप से स्थिति स्पष्ट नहीं होगी, बल्कि पुराने अंत्योदय कार्डों की सूची, पात्रता अभिलेख, ग्राम पंचायत स्तर के प्रस्ताव, संबंधित बैठकों के कार्यवृत्त और लाभार्थियों की वास्तविक स्थिति की जांच आवश्यक है।
जनता का सवाल सीधा है—यदि पात्रता के नियम निर्धारित हैं तो उनका पालन किस स्तर पर हुआ? और यदि नियमों की अनदेखी हुई तो उसकी जिम्मेदारी आखिर किसकी तय होगी?
भाजपा सरकार की योजनाओं की मंशा पर नहीं, क्रियान्वयन पर सवाल
उत्तर प्रदेश की भाजपा सरकार और केंद्र सरकार द्वारा गरीब, वंचित, जरूरतमंद और ग्रामीण परिवारों के लिए अनेक जनकल्याणकारी योजनाएं संचालित की जा रही हैं। सरकार की मंशा है कि सरकारी योजनाओं का लाभ अंतिम पायदान पर खड़े व्यक्ति तक पहुंचे और पात्र व्यक्ति को किसी बिचौलिए या अनियमित व्यवस्था के कारण उसके अधिकार से वंचित न होना पड़े।
सरकार द्वारा पारदर्शिता, जवाबदेही और गरीबों तक योजनाओं की पहुंच को लेकर लगातार जोर दिया जाता रहा है। यही कारण है कि यदि किसी स्थानीय स्तर पर कथित अनियमितता होती है तो उसका असर केवल एक पंचायत या एक लाभार्थी तक सीमित नहीं रहता, बल्कि इससे सरकार की योजनाओं के प्रति जनता के विश्वास पर भी असर पड़ता है।
इसलिए लालगंज ब्लॉक में उठ रहे सवालों का समाधान भी निष्पक्ष जांच और पारदर्शी कार्रवाई से ही संभव है। सरकार की योजनाओं की मंशा पर सवाल नहीं, बल्कि उनके स्थानीय स्तर पर क्रियान्वयन की निगरानी और जवाबदेही सुनिश्चित करना प्रशासन की जिम्मेदारी है।
कमीशनखोरी की चर्चा ने बढ़ाई बेचैनी, जांच से ही खुलेगा सच
लालगंज क्षेत्र में विकास कार्यों और सरकारी योजनाओं को लेकर कथित कमीशनखोरी तथा अनियमितताओं की चर्चाएं भी सुनने को मिल रही हैं। हालांकि इन आरोपों की स्वतंत्र एवं आधिकारिक पुष्टि अभी आवश्यक है, लेकिन यदि जनता के बीच इस तरह की चर्चाएं लगातार बनी हुई हैं तो प्रशासन को इसे गंभीरता से लेते हुए तथ्य सामने रखने चाहिए।
सरकारी योजनाओं में धनराशि का उपयोग जनता के हित के लिए होता है। इसलिए सड़क, नाली, पंचायत भवन, स्वच्छता, आवास, शौचालय, लाभार्थी योजनाओं तथा अन्य विकास कार्यों में यदि कहीं गड़बड़ी की शिकायत है तो संबंधित रिकॉर्ड की जांच के साथ मौके पर भौतिक सत्यापन भी कराया जाना चाहिए।
चार साल का अतिरिक्त प्रभार बना सबसे बड़ा सवाल
सबसे अहम सवाल यही है कि आखिर एक सचिव के पास वर्षों तक एडीओ पंचायत जैसे महत्वपूर्ण पद का अतिरिक्त दायित्व क्यों बना रहा? यदि विभागीय आवश्यकता के चलते यह व्यवस्था की गई थी तो उसकी नियमित समीक्षा क्यों नहीं हुई? और यदि कार्यभार अत्यधिक था तो क्या इससे पंचायतों की निगरानी प्रभावित हुई?
साथ ही यह भी जांच का विषय है कि अतिरिक्त प्रभार के दौरान संबंधित अधिकारी द्वारा लिए गए प्रशासनिक निर्णय, योजनाओं की समीक्षा, पंचायतों से संबंधित पत्रावलियां और अन्य महत्वपूर्ण कार्य किस प्रकार संचालित किए गए।
ब्लॉक अधिकारियों के बयान से बढ़ी जिम्मेदारी
पूर्व में प्रकाशित खबर के संबंध में ब्लॉक स्तर के अधिकारी से बातचीत किए जाने पर उन्होंने स्वयं को हाल में पदस्थ बताते हुए मामले को देखने की बात कही थी। अब देखना यह है कि इस आश्वासन के बाद प्रशासनिक स्तर पर वास्तव में क्या कदम उठाए जाते हैं।
जनता अब केवल आश्वासन नहीं, बल्कि जांच, सत्यापन और कार्रवाई का परिणाम देखना चाहती है।
जनता पूछ रही—आखिर जिम्मेदार कौन?
लालगंज ब्लॉक की 53 ग्राम पंचायतों में यदि योजनाओं को लेकर सवाल उठ रहे हैं, अतिरिक्त प्रभार वर्षों तक जारी रहने की बात सामने आ रही है और लाभार्थी चयन से लेकर विकास कार्यों तक अनियमितताओं की चर्चाएं हैं, तो जिम्मेदारी केवल एक व्यक्ति तक सीमित करके नहीं देखी जा सकती।
जिम्मेदारी तय करने के लिए यह देखना होगा कि किस अधिकारी के पास कौन-सा दायित्व था, किस स्तर पर निगरानी हुई, किन अभिलेखों के आधार पर भुगतान अथवा लाभ स्वीकृत हुए और शिकायत सामने आने के बाद किस अधिकारी ने क्या कार्रवाई की।
अब निगाह जिला पंचायत राज विभाग, खंड विकास अधिकारी और संबंधित उच्च अधिकारियों पर है।
यदि आरोप गलत हैं तो जांच के माध्यम से स्थिति साफ होनी चाहिए और यदि जांच में अनियमितता प्रमाणित होती है तो जिम्मेदारों पर नियमानुसार कार्रवाई होनी चाहिए। क्योंकि सरकारी योजनाओं में एक-एक रुपये का हिसाब जनता के प्रति जवाबदेही का विषय है।
लालगंज की जनता का सवाल अब यही है—चार साल के अतिरिक्त प्रभार की व्यवस्था की समीक्षा कब होगी? कथित अनियमितताओं की निष्पक्ष जांच कब होगी? अंत्योदय कार्डों की पात्रता की जांच कब होगी? और यदि कहीं सरकारी धन अथवा गरीबों के अधिकार के साथ खिलवाड़ हुआ है तो जिम्मेदारों पर कार्रवाई कब होगी?
अब देखना यह है कि प्रशासन इन सवालों को केवल चर्चा मानकर आगे बढ़ता है या फिर निष्पक्ष जांच के जरिए दूध का दूध और पानी का पानी करता है।







