उतराखंडराजनीति

अंकिता हत्याकांड पर 11 जनवरी को उत्तराखंड बंद का आह्वान बीजेपी बोली- राजनीतिक दलों के झांसे में न आए जनता

देहरादून। अंकिता भंडारी हत्याकांड पर बढ़ते जन आक्रोश को चलते जहां 11 जनवरी को उत्तराखंड बंद का आह्वान किया गया है कि तो वहीं बीजेपी ने इसका विरोध किया। बीजेपी का कहना है कि आम लोग विपक्षी दलों के झांसे में न आए।
अंकिता भंडारी हत्याकांड में सीबीआई जांच की मांग को लेकर प्रदेश भर में प्रदर्शन हो रहे है। प्रदेश के मुख्य विपक्षी दल कांग्रेस समेत अन्य संगठनों ने भी इस मामले को लेकर सरकार के खिलाफ हल्ल बोल किया। सरकार दबाव बनाने के लिए रविवार 11 जनवरी को कांग्रेस समेत अन्य संगठनों ने उत्तराखंड बंद का आह्वान किया है। हालांकि इस मामले पर बीजेपी की भी प्रतिक्रिया आई है।
उत्तराखंड बीजेपी के प्रदेश अध्यक्ष महेंद्र भट्ट ने कहा कि प्रदेश के सभी लोगों से संयम से काम लेना चाहिए। उन्होंने प्रदेश की जनता से राजनीतिक दलों के झांसे में न आने की अपील की है। प्रदेश अध्यक्ष महेंद्र भट्ट ने कहा कि वो पहले दिन से कह रहे हैं कि प्रदेश के माहौल को बिगड़ने का प्रयास नहीं होना चाहिए। तथ्य हीन बातों पर आंदोलन करना और प्रदर्शन करना अब धीरे-धीरे बेनकाब होता जा रहा है।
उन्होंने उत्तराखंड की जनता से अपील की है कि इस प्रकार के हथकंडे अपने वाले राजनीतिक दलों को कम से कम जनता माफ नहीं करेगी। इस पूरे मामले में दूध का दूध और पानी का पानी होगा। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने खुद अंकिता भंडारी के माता-पिता से मुलाकात की है। उनसे सभी तरह की बातचीत हो गई है और उनकी जो भी अपेक्षाएं सरकार से है, उन अपेक्षाओं पर खरे उतरते हुए मुख्यमंत्री जल्दी को ही बड़ी घोषणा करेंगे। बता दें कि मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने अंकिता भंडारी हत्याकांड में सीबीआई जांच की संसुस्ति दे दी है।
महेंद्र भट्ट ने कहा कि कांग्रेस इस मामले को उछालकर अंकिता भंडारी की आत्मा को दुरूखी करने का काम किया है। कांग्रेस कितना ही प्रदर्शन करें, जनता उनके साथ देने वाली नहीं है। उन्होंने इस मामले में बढ़ चढ़कर आंदोलन कर रहे लोगों और कांग्रेस से भी अपील की है कि फर्जी बातों को लेकर माहौल को खराब ना करें। उन्होंने कहा कि वह लगातार इस बात को कह रहे हैं कि कांग्रेस के पास और कोई मुद्दा नहीं है। उनके पास विकास कार्य और जन समस्याओं को लेकर कोई विषय नहीं है। कांग्रेस इस तरह के प्रदेश का माहौल खराब कर 2027 के विधानसभा चुनाव के लिए अपनी खोई हुई राजनीतिक जमीन तलाश रही है। हालांकि कांग्रेस उसमें भी फेल साबित हो रही है।

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