आस्थाउतराखंड

रामलीला में हुआ अधर्म पर धर्म का विजयघोष, रावण वध पर गूंजा ‘जय श्रीराम’

मेघनाद वध और सती सुलोचना के प्रसंग ने दर्शकों को किया भावुक

डोईवाला। हिमालयन रिक्रिएशनल एंड वेलफेयर ट्रस्ट की ओर से स्वामी राम हिमालयन विश्वविद्यालय, जौलीग्रांट के सेंट्रल पार्क में चल रहे रामलीला महोत्सव के नौवें दिन कुंभकरण वध, मेघनाद वध, सती सुलोचना, अहिरावण वध और रावण वध का भव्य मंचन किया गया। राम-रावण के अंतिम युद्ध ने दर्शकों को रोमांचित कर दिया।

मंचन की शुरुआत महाबली कुंभकरण के वध से हुई। छह माह सोने वाला कुंभकरण जब युद्ध में उतरा तो वानर सेना में हाहाकार मच गया। श्रीराम ने शक्तिशाली बाणों से उसका वध कर दिया। इसके बाद इंद्रजीत मेघनाद ने लक्ष्मण को शक्ति बाण मारा, पूरा माहौल शोक में डूब गया। हनुमान जी संजीवनी बूटी लाए और लक्ष्मण मूर्छा से जागे। इसके बाद लक्ष्मण और मेघनाद का घमासान युद्ध हुआ, जिसमें लक्ष्मण ने मेघनाद का वध कर अधर्म को बड़ी पराजय दी।
मेघनाद वध के बाद सती सुलोचना का प्रसंग सबसे मार्मिक रहा। अपने पति का कटा हुआ शीश हाथों में लेकर सुलोचना ने अपने सतीत्व की शक्ति से राम दल में जाकर पति का अंतिम संस्कार किया। सुलोचना के पतिव्रता धर्म और त्याग को देखकर दर्शकों की आंखें नम हो गईं।
इसके बाद अहिरावण ने छल से राम-लक्ष्मण को पाताल ले जाने का प्रसंग दिखाया गया। हनुमान जी ने अहिरावण का वध कर प्रभु को मुक्त कराया और मकरध्वज से मिलन हुआ। अंत में राम और रावण का अंतिम युद्ध हुआ। रावण के दसों शीश काटने पर भी जब वह नहीं मरा, तो विभीषण के बताने पर श्रीराम ने अमृत कलश पर बाण मारकर रावण का वध किया। रावण के गिरते ही पंडाल ‘जय श्रीराम’ के उद्घोष से गूंज उठा और अधर्म पर धर्म की जीत का संदेश दिया गया।

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